Chast Ki Namaz Ka Tarika – चाश्त की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका

आज आप बहुत ही फजिलत भरी नमाज़ यानी कि चाश्त की नमाज़ पढ़ने का दुरूस्त तरीका जानेंगे, हम सभी का रब अपने बन्दों को कई तरह के इबादतों से इस लिए नवाज़ा की हम सभी का और हम सभी के रब का रिश्ता और खुबसूरत हो सके जिस के जरिए हम और आप अपने रब को राजी़ रख सकें साथ ही हम सभी का ज़िन्दगी में बरकत व रहमत हासिल हो सके।

आज हम और आप एक इसी तरह की नमाज़ जिसका नाम हम सभी के बीच चाश्त की नमाज़ से मशहूर है हम लोग को अपने इस हसीं रंज भरी जिन्दगी में ज़रूर अदा करनी चाहिए वो इसलिए नहीं की यह जरूरी है बल्कि इसलिए कि इस नमाज़ को पढ़ने से दुनियावी सुकून के बाद भी आखिरत में भी सुकून है।

हम सभी लोग पांच वक्तों की नमाज़ का मुकम्मल तरीका तो जानते हैं लेकिन इस नमाज़ की जानकारी या तो अधूरी मालुम होती है या फिर होती ही नहीं क्यूंकि यह हम लोग हर रोज नहीं पढ़ते हैं लेकिन आज आप इस पैगाम को पढ़ने के बाद दुरूस्त तरीके से हर रोज़ चाश्त की नमाज़ वक्त निकाल कर जरूर अदा कीजिएगा।

Chast Ki Namaz Ka Tarika

सबसे पहले आपको बता दें कि चाश्त की नमाज़ दो रकअत की नियत से मुकम्मल करना अफज़ल माना जाता है:-

Chast Ki Namaz Ka Tarika – पहली रकअत

  • सबसे पहले चाश्त की नियत करें।
  • इसके बाद अल्लाहु अकबर कह कर हांथ बांध लें।
  • फिर सना यानी सुब्हान कल्ला हुम्मा व बि हम् दिक‌ पुरा पढ़े।
  • फिर इसके बाद अउजुबिल्लाहि मिनश शैतानिर्रजीम को पढ़ें।
  • फिर अब तस्मियह यानी बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ें।
  • इसके बाद सुरह फातिहा यानि अल्हम्दु लिल्लाहि शरीफ पढ़े।
  • अल्हम्दु शरीफ को पुरा पढ़ने के बाद आहिस्ते से आमीन कहें।
  • फिर कुरान शरीफ की कोई भी छोटी या बड़ी सुरह पढ़ सकते हैं।
  • फिर अल्लाहु अकबर कह कर रूकुअ करें और तीन बार, पांच बार या सात बार सुब्हान रब्बियल अजिम पढ़ें।
  • इसके बाद समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहते हुए रूकुअ से सर उठाएं फिर उठने पर रब्बना लकल हम्द कहें।
  • इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे करें, इसमें 3 तीन बार, 5 पांच बार, या 7 सात बार सुब्हान रब्बियल अला पढ़ें।
  • अब यहां पर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और कुछ देर के लिए बैठे रहें।
  • फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए दुसरी सज्दा करें और कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बियल अला पढ़ें।
  • यहां तक पहली रकअत अदा हुई अब अल्लाहु अकबर कहते हुए दूसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएं।

Chast Ki Namaz Ka Tarika – दुसरी रकअत

  • यहां सबसे पहले बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ें।
  • फिर सुरह फातिहा यानि अल्हम्दु लिल्लाहि शरीफ पूरा पढ़े।
  • अल्हम्दु शरीफ को पुरा पढ़ने के बाद आहिस्ते से आमीन कहें।
  • इसके बाद कुरान शरीफ की कोई भी छोटी या बड़ी सुरह पढ़ें।
  • फिर अल्लाहु अकबर कह कर रूकुअ करें और कम से कम 3 तीन बार सुब्हान रब्बियल अजिम पढ़ें।
  • अब पढ़ने के बाद समिअल्लाहु लिमन हमिदह कहते हुए रूकुअ से सर उठाएं फिर उठने पर रब्बना लकल हम्द कहें।
  • इसके बाद अल्लाहु अकबर कहते हुए सज्दे करें, इसमें भी कम से कम 3 तीन बार सुब्हान रब्बियल अला पढ़ें।
  • अब यहां पर अल्लाहु अकबर कहते हुए उठे और कुछ देर के लिए बैठे रहें।
  • फिर अल्लाहु अकबर कहते हुए दुसरी सज्दा करें और कम से कम तीन बार सुब्हान रब्बियल अला पढ़ें।
  • अब अल्लाहु अकबर कहते हुए तशह्हुद के लिए बैठ जाएं और अतहियात शरीफ पढ़ें।
  • अतहियात पढ़ते हुए जब कलिमे ला पर पहुंचे तो अपने दाहिने हाथ से शहादत उंगली उठाएं और इल्ला पर गिरा दें।
  • इसके बाद दुरूद ए इब्राहिम पढ़ें फिर दुआए मासुरह पढ़ें और सलाम फेर लें।
  • यहां तक आप की चाश्त कि नमाज़ की दो रकअत नमाज़ मुकम्मल हो जाएगी।

आप इसी तरह दो दो रकअत की नीयत करके जितनी चाहे ज्यादा से ज्यादा 12 रकात अदा कर सकते हैं।

चाश्त की नमाज़ की नियत

आपको बता दें कि यह एक नफ्ल नमाज़ ही है लेकिन इसकी फजिलत और बाकी नफ्ल नमाजों से अफज़ल है, इसलिए इस की नीयत कुछ इस तरह से करेंगे:-

चाश्त की नमाज़ की हिन्दी नियत:- नीयत कि मैने दो रकअत नमाज़ चाश्त की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा काअबा शरीफ कि तरफ अल्लाहु अकबर।

चाश्त नमाज़ की अरबी नियत:- नवैतुअन उसल्लीय लिल्लाही तआला रकाति सलाति नफ्ली मुतवाजिहन इला जि हातिल का अबतिस श़रिफते अल्लाहु अकबर।

चाश्त कि नमाज़ की रकात

चाश्त कि नमाज़ कम से कम 2 रकअत और ज्यादा से ज्यादा 12 रकात पढ़नी चाहिए, सबसे अफ़जल 12 रकात माना गया, जिस के कारण 12 रकात ही पढ़ना चाहिए, यह आप खुद तय करें कि हमें कितनी रकात पढ़नी है अगर आप के पास वक्त हो तो बारह 12 रकात मुकम्मल पढ़ें।

चाश्त की नमाज़ का वक्त

चाश्त की नमाज़ अदा करने के लिए सब से सही और अफजल समय चौथाई दिन चढ़ने पर अदा करना दुरूस्त होता है, लेकिन आप आफताब बुलन्द होने यानी सुबह में सुरज निकलने के 20 बीस मिनट बाद पढ़ सकते हैं और चाश्त की नमाज़ आप निस्फ फुनहार यानी सूरज को आधे दिन ढलने से कब्ल अदा कर सकते हैं।

आप सुबह के समय का अंदाजा इस तरह से भी लगा सकते हैं कि सूरज निकलने के बाद जब ज्यादा चमक उसमें आ जाए कि अपनी नजर सूरज पर ना टिका पाएं क्योंकि सूरज निकलने के तुरंत बाद सूरज से नजर मिला लेते हैं लेकिन जब नजर मिलाने में आंखों में तकलीफ हो तो यहां से भी चाश्त की नमाज अदा करने का वक्त शुरू हो जाता है।

चाश्त की नमाज़ की फजिलत

चाश्त की नमाज़ पढ़ने वाले को अल्लाह तआला उस शख्स को हर दिन व रात एहसान व सदका करेगा।

जिसने आठ रकअत की नमाजे चाश्त पढ़ी अल्लाह तआला उसे कानितीन यानी फरमाबरदार में लिखेगा।

चाश्त कि नमाज़ छः रकअत पढ़ी इस छः रकअत नमाज़ पढ़ने से उसे यानी पढ़ने वाले की किफायत की जाएगी।

चाश्त की नमाज़ दो रकअत पढ़ने से गाफिलीन होगा यानी नेक काम से गाफिल रहने वालों में नहीं लिखा जाएगा।

जिसने चाश्त कि नमाज़ छः रकअत पढ़ी इस छः रकअत नमाज़ पढ़ने से उसे यानी पढ़ने वाले की किफायत की जाएगी।

चाश्त की नमाज़ पढ़ने से गुनाहों की बख्सिस होती है अगर्चे वोह समंदर के झाग के बराबर भी हो तो बख्श दिया जाता है।

चाश्त की नमाज़ बारह रकअत पढ़ने वालों की हम सभी का रब अल्लाह तआला उसके लिए जन्नत में सोने का महल बनाएगा।

हमारा रब का महबुब सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया आदमी का सभी जोड़ के बदले यानी 360 तीन सौ साठ जोड़ों के बदले सदका करना है हर तस्बीह, हर हम्द, हर अल्लाहु अकबर और हर ला इलाहा इल्लल्लाहु कहना, या अच्छी बात का हुक्म करना सदका है लेकिन इन सब कि तरफ से दो रकात चाश्त की किफायत करनी है।

FAQ

चाश्त कि नमाज़ कब पढ़ना चाहिए?

चाश्त कि नमाज़ सुरज निकलने के 20 बीस मिनट बाद से लेकर आधी दिन से पहले पढ़ना चाहिए।

चाश्त कि नमाज़ कितनी रकात होती है?

चाश्त कि नमाज़ कम से कम 2 रकात और ज्यादा से ज्यादा 12 रकात पढ़नी चाहिए।

आख़िरी बात

हमने इस पैगाम के जरिए आप को चाश्त कि नमाज़ अदा करने का सही और दुरुस्त तरीका को बहुत ही आसान जबान में पेश किया है, इस आर्टिकल में आपने जाना चाश्त की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका साथ ही साथ हमने इस में चाश्त कि नमाज़ को अदा करने का दुरुस्त वक्त और नियत से जुड़ी बातें भी बताई।

हमने इस पैगाम को बहुत ही आसान लफ्जों में लिखा जिसे पढ़ने के बाद आप आसानी से समझ गए होंगे, हमारा मकसद शुरू से यही रहा है कि हम सभी जानकारी को आसान भाषा में पेश करें जिसे पढ़ने के बाद आसानी से समझ में आ जाए अब आप बताएंगे कि हमारा यह पैगाम आपको कैसा प्रतीत हुआ अपना व्यक्त कमेंट बॉक्स के माध्यम से हम तक जरूर साझा कीजिएगा।

आपको यदि यह पैगाम अच्छा लगा हो तो इस पैगाम को सभी मोमिनो तक जरूर पहुंचाएं जिसका फायदा पढ़ने वाले के साथ साथ हमें और आपको भी होगा क्योंकि हमारा रब अल्लाह तबारक व तआला कहता है कि सही इल्म पहुंचाना बहुत बड़ा नेकियों में से एक नेकी है, आप से भी गुजारिश है कि अपने नेक दुआओं में हमें भी जरूर याद करें।

My name is Muhammad Ittequaf and I'm the Editor and Writer of Zoseme. I'm a Sunni Muslim From Ranchi, India. I've experience teaching and writing about Islam Since 2019. I'm writing and publishing Islamic content to please Allah SWT and seek His blessings.

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