Qaza Namaz Padhne Ka Tarika – क़जा नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा

आज हम जानेंगे कि क़जा नमाज़ अदा करने का तरीक़ा क्या होता है, हमारे मज़हब इस्लाम में सबसे बड़ी और अफज़ल इबादत नमाज़ को कहा जाता है, हम सभी को नमाज़ पढ़ना बेहद ही जरुरी है, अगर किसी वजह से हम नमाज़ अगर उस समय अदा नहीं कर पाते हैं तो बाद में क़जा कर सकते हैं।

हम सभी मोमिनों के लिए यह अल्लाह की तरफ से आला तोहफ़ा है, हमारी और आपकी किसी वजह से नमाज़ छुट जाती है तो हम क़जा करते हैं, ऐसे में हम सभी के लिए यह जरूरी है कि इस नमाज को अदा करने के लिए तरीका क्या होता है इस नमाज को हम इस वक्त पढ़ कर सकते हैं, और इस नमाज की नियत कैसे की जाती है।

इन सभी बातों को जानना हम सभी मेहमानों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि जानकारी हासिल होने के बाद ही हम किसी भी नमाज को दुरुस्त तरीके से मुकम्मल करते हैं, आज हम और आप इस पैगाम के जरिए जानेंगे कि क़जा नमाज का तरीका क्या होता है साथ ही साथ क़जा की नमाज से जुड़ी सभी जरुरी इल्म हासिल करेंगे।

Qaza Namaz Padhne Ka Tarika

  1. सबसे पहले आप नियत कर लें, अगर आपको नीयत नहीं मालूम है तो नीचे सभी क़जा नमाज़ों की नीयत बताई गई है इसके बाद हर नमाज़ की तरह सना पढ़े।
  2. इसके बाद अऊजुबिल्लाहि मिनश शैतानिर्रजीम बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम पढ़ने के बाद अल्हम्दु शरीफ पढ़ कर कोई सूरत पढ़े।
  3. इसके बाद रुकुअ और सजदा करें, यहां पर आप तीन तीन बार सुब्हान रब्बियल अजीम और सुब्हान रब्बियल अला कहें।
  4. यहां पर आप की पहली रकअत मुकम्मल हो गई।
  5. फिर दूसरी रकअत भी इसी तरह मुकम्मल करें, इसके बाद तशहहुद पढ़ कर और दुरूद शरीफ़, दुआए मासूरह पढ़ने के बाद सलाम फेर लें।

Qaza Namaz Padhne Ka Tarika Umar Ki

  • जिन लोगों के जिम्मे बहुत ज्यादा क़ज़ा नमाज़े हो उन लोगों की सहूलियत के लिए और नमाजे जल्द अदा हो जाए इसीलिए इमाम अहले सुन्नत आला हजरत मुजद्दीदे आजम सैयदना इमाम अहमद रजा कादरी रहमतुल्ला अलैह ने तखफीफ यानि छूट की चार सुरतें बयां की है।
  • सबसे पहले आपको कजाए उम्री की नियत करने के बाद सना अल्हम्दु शरीफ और सुरह पढ़ने के बाद रुकुअ सजदा करना है, जैसे हमने आपको उपर में बताया है।
  • पहली छूट की बात की जाए तो फर्ज की तीसरी और चौथी रकअत में अल्हमदु शरीफ़ की जगह सिर्फ सुब्हान अल्लाह तीन बार कह कर रुकुअ में जाना है, यह छूट सिर्फ फर्ज की तीसरी और चौथी रकअत के लिए है, वित्र की तीनों रकअतो में अल्हम्दु शरीफ और सुरह दोनो पढ़ना चाहिए।
  • फिर दूसरी छूट की बात की जाए तो रुकुअ और सजदे में सिर्फ एक एक बार सुब्हान रब्बियल अज़ीम और सुब्हान रब्बियल अला पढ़ना है, यहां पर जब तक पुरा रुकुअ में सुब्हान रब्बियल अज़ीम न पढ़ लें तब तक उठना नहीं है।
  • अगर तीसरी छूट की बात की जाए तो हर नमाज़ के तशहहुद यानि अतहयात पढ़ने के बाद दुरूद शरीफ़ और दुआ के बजाए सिर्फ यह दुरूद शरीफ अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मदींव व आलेही पढ़कर सलाम फेरना है।
  • सबसे अंतिम और तीसरी छूट की बात की जाए तो यहां पर आपको नमाजे वित्र में तीसरी रकअत में दुआए कुन्नूत की जगह एक बार या तीन बार रब्बिगफीरली कहने के लिए हुक्म है।

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क़जा नमाज़ कब पढ़ना चाहिए?

क़जा नमाज़ो को सिवाय मकरूह वक्त के अलावा कभी भी अदा कर सकते हैं यहां तक के फजर और असर की फर्ज नमाज़ अदा करने के बाद भी अदा कर सकता है।

इस नमाज़ को छुपकर पढ़े मस्जिद में सबके सामने न पढ़े, क़जा नमाज़ को सूरज की किरण चमकने से बीस मिनट तक ना पढ़े, जवाल शुरू होने से लेकर खत्म होने तक न पढ़े।

सुरज डूबने से लगभग बीस मिनट पहले भी नहीं पढ़े क्यूंकि यह मजरूह वक्त होता है इन वक्तों में कोई भी अदा या क़जा पढ़ना नजायज है।

क़जा नमाज़ की नियत

फज्र की क़जा की नीयत:- नीयत की मैने दो रकअत नमाज़ क़जा के फज्र फर्ज की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

जुहर की क़जा की नीयत :- नीयत की मैने चार रकअत नमाज़ क़जा के जुहर फर्ज की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

असर की क़जा की नीयत:- नीयत की मैने चार रकअत नमाज़ क़जा के असर फर्ज की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

मगरिब की क़जा की नीयत:- नीयत की मैने तीन रकअत नमाज़ क़जा के मगरिब फर्ज की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

इशा की क़जा की नीयत:- नीयत की मैने चार रकअत नमाज़ क़जा के इशा फर्ज की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

वित्र की क़जा की नीयत:- नीयत की मैने तीन रकअत नमाज़ क़जा के वित्र वाजिब की अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

कजाए उम्र के लिए:- नीयत की मैने (दो तीन चार) रकअत नमाज़ क़जा जो मेरे जिम्मे बाकी है उनमें से पहले (फज्र, जुहर, असर, मगरिब, इशा) फर्ज अल्लाह तआला के लिए मुंह मेरा काअबा शरीफ़ की तरफ अल्लाहू अकबर।

क़जा नमाज़ किसे कहते हैं?

किसी भी नमाज को जैसे फज्र जुहर असर मगरिब और इशा को उसके वक्त पर अगर अदा नहीं किया और वक्त गुजर जाने के बाद अमल करने को क़जा कहते हैं, क़जा की नमाज़ अदा करने वालों के लिए यह फर्ज है कि सच्चे दिल से तौबा करें और जल्द से जल्द क़जा पढ़ ले, अगर क़जा की नमाज़ पूरे उम्र के लिए है तो उसे हर दिन का बीस रकअत जोड़कर अदा करे क्यूंकि जिन्दगी कब छूटेगी कोई भरोसा नहीं।

क़जा नमाज़ से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

वित्र की क़जा नमाज़ पढ़ते वक्त इस बात का जरुर ध्यान रखें की तीसरी रकअत में हाथ न उठाएं बल्कि बगैर हाथ उठाएं तकबीर कहले और दुआए कुनूत पढ़े।

क़जा की नमाज़ नफ्ल नमाजो से बहुत ज्यादा जरूरी होता है जिसके जिम्मे किसी भी नमाज का फर्ज नमाज बाकी है उनका नफ्ल नमाज़ कबूल नहीं होता।

क़जा की नमाज दूसरों के सामने इस तरह ना अदा करें की उसे पता चल जाए क्योंकि कजा करना गुनाह है, और गुनाह का इजहार नहीं करना चाहिए।

अगर किसी पर पांच या इससे कम क़जा हो तो उसे वक्त की नमाज़ से पहले क़जा नमाज़ को पढ़ना चाहिए, वक्त की नमाज़ से पहले क़जा की नमाज़ पढ़ना फर्ज है।

अगर किसी का छः नमाज़ या उससे अधिक नमाज़ क़जा हो गई हो तो उसे पहले वक्त की नमाज़ अदा करनी चाहिए, बाकी छूटी हुई क़जा नमाजों को कभी भी मकरूह वक्त के अलावा पढ़ सकता है।

अगर उम्र भर की क़जा नमाज़ अदा करनी हो तो मर्द को 12 साल आज तक हर दिन का बीस रकअत और औरत का 9 साल आज तक हर दिन का बीस रकअत जोड़कर क़जा पढ़नी चाहिए।

हमारी मां बहनों को माहवारी वाले दिन की नमाज़ की क़जा नहीं होती साथ ही साथ बच्चे पैदा होने के बाद भी जिस दिन तक खून आते रहता है उन दिनों को भी क़जा के लिए नहीं जोड़े।

सभी फर्ज नमाजों के लिए क़जा जरुरी है, वित्र की क़जा वाजिब है, सभी की क़जा नमाज़ जितनी जल्दी हो सके पढ़ लेना चाहिए, क़जा के लिए बिना वजह देर करना गुनाहे कबीरा है।

आखिरी बात

हमने इस पैगाम के जरिए आपको क़जा की नमाज का तरीका बताया है, यहां पर लिखी सभी बातों को आप आसानी से पढ़ कर क़जा नमाज पढ़ने का तरीका समझ गए होंगे, इस लेख को हमने अच्छे तरीके से जानकारी इकट्ठा करने के बाद सभी बातों को आसान लफ्जों में बयां की है

हमारा कोशिश अव्वल से ले कर आखिर तक यही रहा है कि हम अपने मोमिनों के लिए इल्म की सभी बात को आसान भाषा में लिखें जिसे पढ़ने के बाद सभी आसानी से समझ जाए, और हमें यह एहसास हो रहा है कि हम अपनी इस कोशिश से कामयाब हो रहे हैं, अगर आप कुछ बात हम तक पहुंचाना चाहते हैं तो बेझिझक कमेंट बॉक्स के माध्यम से उस बात को हम तक पहुंचा सकते हैं।

My name is Muhammad Ittequaf and I'm the Editor and Writer of Zoseme. I'm a Sunni Muslim From Ranchi, India. I've experience teaching and writing about Islam Since 2019. I'm writing and publishing Islamic content to please Allah SWT and seek His blessings.

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