Shab E Barat Ki Fazilat In Hindi – 2024 शबे बरात की फजीलत

आज के इस खूबसूरत पैगाम में आप बहुत ही अच्छी बात यानी शबे बरात की फजीलत हिंदी में जानेंगे, हमने यहां पर शबे बरात की फजीलत बहुत ही आसान लफ्ज़ों में पेश किया है जिसे आप आसानी से पढ़ कर समझ जाएंगे।

हम सभी के दरमियान हर साल शबे बरात अपनी बेशुमार रहमत व बरकत लेकर आता है और इसकी रहमत और बरकत को हम सब हासिल करने के लिए शबे बरात की रात में शबे बरात की नमाज पढ़ते हैं।

इस रात में हम सब खूब इबादत जैसे कुरान पाक पढ़ना दुआ अज़कार करना और दिन में रोजा रखना ऐसे इबादत में डूबे रहते हैं जिसकी फजीलत बहुत है आज यहां इसकी ही फजीलत आप जानेंगे।

Shab E Barat Ki Fazilat
Shab E Barat Ki Fazilat In Hindi

Shab E Barat Ki Fazilat In Hindi

  1. शबे बरात कि रात में अल्लाह आसमाने दुनिया पर तजल्ली फरमाता है और ढेर सारी बन्दों कि गुनाहों की मगफिरत करता है।
  2. अल्लाह तआला का फरमान-ए-आलिशान है कि शबे बरात की रात दो रकात नमाज पढ़ना चार सौ बरस की इबादत से बेहतर होगा।
  3. शबे बरात की रात की गई दुआ कुबूल होती है मुहम्मदे अरबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने शाबान की पन्द्रहवीं रात के बारे में फ़रमाया कि इस रात की दुआ रद नहीं की जाती।
  4. शबे बरात की रात में सूरह दुखान पढ़ने से पढ़ने वाले मोमिन या मोमिना की हक में सुबह तक सत्तर हजार फ़रिश्ते मग़फिरत व बख़्शिश की दुआ करते हैं।
  5. शबे बरात में 100 रकात नफ्ल नमाज पढ़ने से एक सौ फ़रिश्ते तीस जन्नत कि खुश खबरी, तीस दोजख के अजाब, तीस दुन्या की आफत दुर करेंगे और 10 शैतान के जाल से बचाएंगे।

शब ए बारात की इबादत जानें

Shab E Barat Ki Fazilat Hadees

एक हदिस के मुताबिक रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया खुश खबरी है उस शख्स के लिए जो शाबान की पन्द्रहवीं शब में अमल ए खैर करे।

एक हदिस पाक के मुताबिक रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जिसने शाबान की पन्द्रह तारीख का रोजा रखा उसको कभी आग न छुएगी।

एक हदिस के मुताबिक बेशक अल्लाह तआला अज्जावजल्ला महर बानी फरमाता है मेरी उम्मत के गुनहगारों पर शाबान की पन्द्रहवीं रात शबे बरात में कबीला बनी कल्ब व कबीला रबी और मुदिर की बकरीयों के बालों की तादाद के बराबर लोगों की बख़्शिश व मग़फिरत होता है।

आपको बताते चलें कि बनी कल्ब, रबी और मुदिर यह अरब के तीन मशहूर कबीले हैं इन तीनों कबीलों के पास बहुत ज्यादा बकरियां थी रिवायत है कि इन के हर एक कबीले की लोगों की बकरीयों की तादाद बीस हजार से ज्यादा थी।

इस इरशाद से मुराद यह है कि इस मुबारक रात की बरकात इस कदर ज्यादा है कि अल्लाह तआला अज्जावजल्ला उम्मत के गुनहगारों की बड़ी तादाद को बख़्शिश व मग़फिरत फरमाता है जो बेशुमार व बेहिसाब है।

एक हदिस के मुताबिक हज़रत अबु बक्र सिद्दिक रदिअल्ला तआला अन्हुं से रिवायत है फ़रमाया कि इरशाद फरमाया रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कि ऐ लोगो शाबान की पन्द्रहवीं रात को उठो बेशक शाबान की पन्द्रहवीं रात लयलतुल मुबारका है पस बेशक अल्लाह तआला अज्जावजल्ला इस रात इरशाद फरमाता है कि क्या मुझ से बख़्शिश व मग़फिरत का चाहने वाला है कि मैं उसकी मग़फिरत कर दूं।

शबे बरात पर हुज़ूर गौसे पाक का फरमान

हुज़ूर गौसे आज़म महबूब सुब्हानी सय्यिदिना शाह अब्दुल कादिर मुहीउद्दीन जिलानी रदीअल्लाह अन्हों ने फ़रमाया शाबान में पांच हर्फ हैं शीन, ऐन‌ ,बा ,‌अलिफ, नून हर हर्फ एक फैजान लेकर आता है और इशारा करता है शीन शराफत, ऐन उलु व बुलंदी, ब बिर यानी नेक, अलिफ यानी मुहब्बत अखुव्बत और नून नूर लेकर आता है गोया इस महिने में शरफ , बुलन्दी , नेकी, मुहब्बत व उलफत और नूर का नुज़ूल होता है।

शबे बरात की चार ख़ास नाम

  • लयलतुल बरात – निजात वाली रात
  • लयलतुर रहमा – रहमत वाली रात
  • लयलतुल मुबारका – बरकत वाली रात
  • लयलतुश‌ शाक – परवाना मिलने चैक मिलने वाली रात

शबे बरात में किन लोगों की मगफिरत नहीं होती

जन्नती सहाबी हजरते उबय बिन का’ब रजियल्लाहु अन्हुं यह फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि

मेरे पास हजरते जिब्रिल अलैहि सलाम शबे बरात में हाजिर हुए और मुझ से कहा कि उठ कर नमाज अदा फरमाइये और अपना सर और हांथ मुबारक आस्मान कि तरफ उठाइए मैंने पुछा ऐ जिब्रिल यह कैसी रात है।

अर्ज कि या मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ये वो रात है कि जिसमें आसमान और रहमत के 300 दरवाजे खोल दिए जाते हैं

अल्लाह पाक के साथ शरीक ठहराने वालों, आपस में बुग्ज व किना रखने वालों, शराबीयों और बदकारो के अलावा सब की मगफिरत कर दी जाती है।

इन लोगों की मगफिरत उस वक्त तक नहीं होती जब तक सच्ची तौबा न कर लें, अलबत्ता शराब के आदी के लिए रहमत के दरवाज़े में से एक दरवाजा खुला छोड़ दिया जाता है

यहां तक कि तौबा कर ले जब वो तौबा कर लेता है तो उस की मगफिरत कर दी जाती है इसी तरह किना रखने वाले के लिए भी रहमत के दरवाज़े में से एक दरवाजा खुला छोड़ दिया जाता है

यहां तक कि वो अपने साथी जब तक बात न कर ले जब वो जिस से किना रखा था उस से बात कर लेता है तो उस की भी मगफिरत कर दी जाती है।

शबे बरात की रात का महत्व जानिए

इस मुबारक रात को हर शख्स का रिज्क लिख दिया जाता है कि इस साल इस तरह से इसको मिलेगा और इतना इस्तेमाल करेगा।

इसी तरह अजल भी लिख दी जाती है कि फला शख्स इतनी मुद्दत तक जिन्दा रहेगा और फलां वक्त पर जिंदगी से रूखसत होगा।

इसी तरह जो काम आइंदा साल होने वाला होता है सब कुछ लिख दिया जाता है इस रात में नई फेहरिस्त तैयार की जाती है और बारगाहे इलाही में पेश की जाती है।

FAQs

शबे बरात की रात को क्या पढ़ना चाहिए?

शबे बरात की रात को शबे बरात की नफ्ल नमाज, कुरान पाक और दुआ पढ़ना चाहिए।

शब ए बारात में किसकी फ़ातिहा होती है?

शब ए बारात में अपने गुजरे अहलो‌ अयाल पुर्खों की फ़ातिहा होती है इस रात उनकी रूह घरों में आती है

शब ए बारात में मुसलमान क्या करता है?

शब ए बारात में हर मुसलमान अल्लाह कि इबादत करता है जिसमें नमाज और कुरान पढ़ता है।

शबे बरात के दिन कौन सी नमाज पढ़नी चाहिए?

शबे बरात के दिन बाद नमाज जुहर दो दो रकात करके 4 रकात नफ्ल नमाज सूरह इखलास के साथ पढ़ना चाहिए।

आख़िरी बात

आपने इस पैग़ाम में बहुत ही अच्छी इल्म से रूबरू हुए जिसमें आपने शबे बरात की फजीलत को जाना और भी बहुत अच्छी जानकारी आपने हासिल की यहां पर हमने सभी बातों को साफ व आसान लफ्ज़ों में बताया था जिसे आप आसानी से समझ जाएं।

अगर अभी भी आप को कुछ बातों में समझने में दिक्कत या डाउट हो तो आप हमसे कॉमेंट करके ज़रूर पूछें हम आपके सभी सवालों और डाउट को क्लियर जरूर करेंगे क्योंकी मेरा मकसद शुरू से अभी तक यही है हम पढ़ने वाले को आसानी से बताएं जिसे वो समझ जाएं।

ऐसी मुबारक व मुकद्दस रात कद्र न करना इबादत में सुस्ती व काहिली करना सिनेमा बिनी, चाय खानो में रात बिताना आतिश बाजी खुद जलाना या बच्चों की आदत डालना रात लहु व लअब और गप शप में गुजार देना बदकारी करना लोगो को सताना गिबत और चुगली में वक्त जाया करना।

तमाम रात सोते पड़े रहना यह तमाम बातें खुदा और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की नाराज़गी है अल्लाह तआला से दुआ है कि तमाम मुसलमानों को आमाले सालेहा की तौफिक अता फरमाए आमीन। आप भी अपने नेक दुआओं में हमें याद रखें शुक्रिया।

My name is Muhammad Ittequaf and I'm the Editor and Writer of Zoseme. I'm a Sunni Muslim From Ranchi, India. I've experience teaching and writing about Islam Since 2019. I'm writing and publishing Islamic content to please Allah SWT and seek His blessings.

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