Wazu Karne Ka Tarika – 10 Easy Steps में वजू करना सीखिये

आज हम और आप जानेंगे कि वजू करने का सही तरीका क्या होता है, हमें चाहिए कि हम अपने आपको हर तरह की गंदगी और मैल कुचैल से खुद को पाक साफ़ रखें, हमें साफ-सुथरा रहने से किसी भी तरह की जिस्मानी बीमारी होने का खतरा नहीं होता है।

हमें हमेशा बा वजू रहना चाहिए क्योंकि बा वजू हमारा आधा इमान होता है, इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम सभी वजू से जुड़ी जानकारी हासिल करेंगे, एक अच्छे और दुरुस्त तरीके से वजू सभी मोमिनों को करना चाहिए।

हम सभी मज़हब ए इस्लाम के लिए यह काफी महत्वपूर्ण होता है, हम सभी के लिए वजू करना बेहद जरूरी है, आज ऐसे ही कुछ दुरुस्त और इस्लामी तरीका से आप वजू करना सीखेंगे इसीलिए इस पैगाम को ध्यान से पढ़ें।

वजू करने का तरीका

  1. बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़ना
  2. हाथों को गिट्टों तक धोना
  3. मिस्वाक करना
  4. 3 बार कुल्ली करना
  5. नाक साफ करना
  6. 3 बार चेहरा धोना
  7. हाथों को बाजु तक 3 बार धोना
  8. सर का मसह करना
  9. 3 बार दोनों पावों को धोना
  10. वजू करने का मुकम्मल तरीका जानने के लिए पूरा पैगाम पढ़ें

इसे भी पढ़ें : नमाज़ पढ़ने का तरीका

पहले बिस्मिल्लाह पढ़ना

सबसे पहले चाहिए कि किसी भी पाक जगह पर बैठकर, अपने दिल में वजू का पक्का इरादा करके खुद की जानिब किब्ला की ओर करके बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम पढ़कर शुरुआत करें।

फिर हाथों को गिट्टों तक धोना

फिर गट्टों तक हाथों को पानी से मले और उंगलियों का खिलाल करें फिर बाएं हाथ में लोटा वगैरह लेकर दाहिने हाथ पर उंगलियों की तरफ से शुरू कर के तीन बार धोएं।

इसके बाद मिस्वाक करना

इसके बाद आप मिस्वाक करें, अगर मिस्वाक न हो तो उंगली से अपने दांतों और मसूड़ों को मल कर साफ करें और अगर दांत या तालू में कोई चीज अटकी या चिपकी हो तो उसको मिस्वाक की मदद से निकाले।

फिर कुल्ली करना

फिर तीन मरतबा कुल्ली करें, हर बार इस तरह से कुल्ली करें कि मुंह के तमाम जड़ों और दांतो का सब जगह पानी पहुंच जाए अगर रोजे की हालत में है तो ऐसा करना जरूरी नहीं, क्योंकि हलक से नीचे पानी उतर जाने का खतरा रहता है।

फिर नाक साफ करना

अब आपको दाहिने हाथ की मदद से नाक में नरम हिस्सों तक सांस लेने की मदद से पानी तीन बार उपर तक चढ़ाना है, अगर रीठ वगैरा लगा हो तो बाए हाथ की मदद से निकाले, फिर नाक साफ करलें।

फिर चेहरा धोना

यहां आप अच्छे तरीके से एक कान की लौ से लेकर दुसरे कान की लौ तक, माथे पर बाल जमने की जगह से लेकर ठोड़ी के नीचे तक पानी बहाएं, कहीं पर भी पानी बहने से बच ना जाए इसका जरूर ध्यान रखें।

अगर दाढ़ी हो तो गर्दन की ओर से उंगली लगा कर उपर की ओर निकाले, अपने हाथों की उंगलियों की मदद से दाढ़ी में अच्छे से खिलाल करें।

फिर हाथों को बाजु तक धोना

फिर तीन दफा पहले दाहिने हाथ के कोहनी समेत मतलब कोहनी से कुछ उपर तक ही धोएं।

इसके बाद बाएं हाथ के भी कोहनी से उपर तक ही धोएं, अगर उंगली में छल्ला या फिर अंगूठी हो तथा कलाइयों में चूड़ी जेवर वगैरा हो तो इन सभों को हिला हिला कर धोएं, इस तरह से पानी पहुंचाने की कोशिश करें।

फिर मसह करना

आप मसह इस तरह से करें कि दोनों हथेलियों को पानी से भिगो कर दोनों हाथों की तीन तीन उंगलियां की नोक को एक दुसरे हाथ की उंगली की नोक से मिलाए, इसमें अंगूठा और शहादत की उंगली छोड़ना है।

फिर छेओ उंगलियों को अपने माथे पर रखकर पिछे की ओर सर के नीचे आखिरी हिस्से तक ले जाएं, लेकीन यह जरुर ध्यान रखे कि हथेली, अंगूठा, शहादत की उंगली सर के किसी हिस्से को न छूने पाए।

इसके बाद पिछले हिस्से से हाथ माथे पर इस तरह से लाए कि दोनों हथेलियां सर के दाएं बाएं हिस्से पर होती हुई माथे तक वापस आ जाए।

फिर कलीमे की उंगली से कानों के अंदर के हिस्सा और अंगूठे से कान के उपर का हिस्सा मसह करें तथा उंगलियों की पिछले भाग यानि हिस्से से गर्दन का मसह करें।

इसके बाद पांव धोना

सबसे पहले दाहिना पांव तीन बार टखने समेत यानि घुटने से नीचे धोएं, इसके बाद बायां पांव इसी तरह तीन बार धोएं, फिर बाएं हाथ से दोनो पैरों की उंगलियों का खिलाल करें।

इसके बाद वजू के बाद की दुआ यानि ‘अल्लाहुम्म मजअलनी मिनत्तौवाबीन वज्जअलनी मिनल मुततहहिरीन’ पढ़े, अगर आप लोटा वगैरह से वजू किए हैं तो बचा हुआ पानी खड़े हो कर पिलें, यह बिमारियों का शिफा है।

वजू का अर्थ क्या है?

नमाज पढ़ने से पहले या फिर तिलावते कुरान करने से कब्ल और दीन की चीजें करने से पहले खुद को अपने शरीयत के बताए हुए रास्तों के मुताबिक पाक और साफ करना जिसमें सर से लेकर पांव तक भिगाना होता है, साथ ही साथ चेहरा और हाथ पैर को दुरुस्त तथा इस्लामी तरीके से धोने की प्रक्रिया को वजू कहते हैं।

वजू करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  1. वजू करते समय अपने चेहरे को अच्छे से धोएं, इसके बाद दोनों हाथ कुहनियों समेत उपर तक धोए साथ ही साथ सर का मसह करें।
  2. फिर पांव को टखने समेत धोएं इन सभी पर जरूर गौर करें क्योंकि यह वजू के फराइज है इसके बगैर वजू नहीं होगा।
  3. मसह करते वक्त यदि पगड़ी टोपी या दुपट्टा हो तो उसको अपने सर से उतार लें, ऐसे चीजों पर मसह काफी नहीं लेकीन दुपट्टा या सर पर रखी कपड़ा बारीक़ हो तो रहने दें।
  4. इतना बारीक यानि पतला हो की तरी फूट कर सर के सभी हिस्से को तर कर दे यानि भीगा दे तो मसह हो जाएगा।
  5. वजू किसी भी नाजीस जगह यानि नापाक जगह पर बैठकर न करें, और जहां तक कोशिश करें कि फालतू गुप्तगु किसी से न करें।
  6. ऐसा नहीं है कि इन सब चीजों को करने से आपका वजू नहीं होगा बल्कि दुरुस्त तरीके का वजू ना होगा और पूरा सवाब नहीं मिलेगा।
  7. हम और आप यह बात तो जान चुके हैं कि वजू करते वक्त अपना शरीर का अगला भाग किबला की जानिब रखें, ऐसा नहीं है कि इसके बगैर वजू मुकम्मल नहीं होगा ।
  8. लेकिन यह सब मकरुहात चीजें है, इसका जरूर खयाल रखें कि किब्ला के जानिब थूके या खंखारे नहीं हो सके तो हर वक्त इस बात का खयाल रखें।
  9. वजू के दौरान हो सके तो बहुत कम मात्रा में पानी का खपत करें यह भी एक बहुत बड़ा जिम्मेदारी होता है,
  10. अब इस तरह भी इतना कम खर्च ना करें कि सुन्नत अदा ना हो, जैसे बताया गया है सभी चीजों को अच्छे से धोना और अधिक हिस्से को कम से कम तीन बार धोना है।
  11. आपको हमने उपर में बताया कि अगर हाथ में अंगूठी वगैरा या फिर चूड़ी वगैरह हो तो उसे अच्छे से हिला कर धोए ताकि पानी का कतरा कतरा सभी हिस्से में पहुंच जाए।
  12. लेकिन यदि ऐसा ना हो तो आपको चाहिए कि वैसे चीजों को अपने हाथों से उतार कर वजू करें।

वजू टूटने का कारण

  1. पेशाब के रास्ते से किसी भी चीज़ को निकलने से या पखाने की रास्ते से निकलने पर साथ ही पेशाब या पखाना से वजू टूट जाती है।
  2. हम सभी मोमिनों की पिछले मकाम से यानि पखाने के रास्ते से हवा निकलने से वजू टूट जाती है।
  3. अगर बदन के किसी भी हिस्से से किसी कारण खून या मवाद पीप निकलने के बाद ऐसी जगह लगना जो वजू या गुस्ल का फर्ज होता है इसे भी वजू टूट जाती है।
  4. नमाज़ के दौरान रुकुअ या सजदे में या फिर किसी वक्त कहकहा लगा कर हंसने से वजू चली जाती है।
  5. किसी चीज का इस हद तक नशा चढ़ गया हो कि चलने में कदम लड़खड़ा रहा हो ऐसे में भी वजू टूट जाती है।
  6. किसी भी तरह का कय यानि उल्टी या फिर मुंह भर कर खाना पानी या फिर खून तथा पित की मुंह भर के कय हो जानें से वजू टूट जाती है।
  7. अगर दांतों से इस कदर रक्त सराव यानी खून आ रही हो जिसके वजह से मुंह से निकलने वाले पानी यानी थूक का रंग सुर्ख हो जाए तो ऐसे में भी वजू चली जाती है।
  8. अगर दुखती हुई आंख से पानी निकल रहा हो तो ऐसे में भी वजू चली जाती है क्योंकि आंसू नापाक है, इस तरह कान नाक पिस्तान वगैरह में दाना या नासूर या कोई मर्ज हो उनकी वजह से पानी बहे इससे भी वजू जाता रहता है।
  9. इस कदर ना सोए की बदन से जोड़ ढीले हो गया हो, चित पट या करवट भी लेट कर ना सोए, ऐसे में वजू टूट जाती है।
  10. इस तरह गसी तरी हो जाना बेहोशी, जुनून आदि में होने से भी वजू टूट जाती है।

वजू की नीयत

वजू की नीयत यही होता है कि आप अपने दिल में इस बात का जिक्र रखें कि मै वजू पाकी हासिल और सवाब की खातिर कर रहा हूं इसके बाद बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़कर दुरूद शरीफ़ पढ़े अल्लाह हुम्म सल्लि अला सय्यदिना व मौलाना मुहम्मदिव व आलिही व असहाबिही अजमइन पढ़े फिर वजू करना शुरू करें।

वजू करने की बाद की दुआ

अल्लाहुम्म मजअलनी मिनत्तौवाबीन वज्जअलनी मिनल मुततहहिरीन

इसके बाद कलिमए शहादत भी पढ़े, इसका तर्जमा ‘ऐ अल्लाह तू मुझे तौबा करने वालों और पाक लोगों में कर दे’ होता है।

औरतों का वजू करने का तरीक़ा

हमारे इस्लाम की शरिअत में दोनों यानि औरत व मर्द के लिए वजू करने का तरीका एक जैसा ही है, आपको मैं दोनों से संबंधित बातों को ध्यान में रखते हुए पूरा तरीका उपर में ही बता दिया है आपको उन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए और सही तरीके से फराइज को करते हुए वजू को पूरा करना है, आज तक किसी भी इस्लामिक किताब में औरत और मर्द का वजू करने का तरीका अलग-अलग नहीं बताया गया है।

आप लोग ऐसी बातों में ना उलझे कि औरतों के लिए वजू का तरीका अलग होता है, इस बात मेरे जहन में आया की बहुत मोमिनिन की गलतफहमी होती है तथा इसे ढूंढते रहते हैं की औरतों का वजू करने का तरीक़ा क्या होता है, तब मैने आपकी गलतफहमी और उलझने दूर करने के लिए यहां पर बताया है।

वजू की सुन्नतें

  1. नीयत करना।
  2. बिस्मिल्लाहिर रहमानीर रहीम पढ़ना।
  3. पहले दोनो हाथ को गट्टों तक धोना।
  4. मिसवाक करना।
  5. तीन बार कुल्लि करना।
  6. तीन बार नाक में पानी डालना।
  7. बाएं हाथ से नाक साफ करना।
  8. दाढ़ी का उंगलियों से खिलाल करना।
  9. हाथ पांव की उंगली का खिलाल करना।
  10. हर उजव हिस्से को तीन तीन बार धोना।
  11. पुरे सर का एक बार मसह करना।
  12. तरतीब से वजू करना।
  13. कानों का मसह करना।
  14. हर मकरूह बात से बचना।
  15. मुंह के निचे दाढ़ी वाले बाल पर गिला हाथ फिराना
  16. लगातार धोना एक अंग को सूखने से पहले ही दुसरे को धोना।

वजू के दुनियावी फ़ायदे

  1. वजू में हाथ धोने से हमे एक्जिमा फुफुंदी और भी कई तरह की बीमारियों से निजात मिलता है।
  2. वजू में कुल्ली करने से बेहतरीन सफाई हो जाती है यदि ऐसा हो जाता है तो हम और आप अमराज का खतरा से बच जाते हैं, साथ ही एड्स जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है, क्यूंकि एड्स का लक्ष्ण मुंह की गंदगी भी होता है।
  3. मुंह का सही से सफाई होती है तो किसी भी प्रकार की मसूड़ों और दातों से संबंधित रोग से बचाव होता है, क्यूंकि अन्दर फंसी खाने की टुकड़ों से ही हमें मुक्ति मिलती है।
  4. नाक में पानी डालने से फेफड़ों को शुद्ध हवा मिलती है क्योंकि जब हम नाक साफ करते हैं तो सभी गंदगी निकल आती है जिसके कारण हम और आप आसानी से शुद्ध सांस ले सकते हैं।
  5. आजकल चेहरा धोने से बहुत तरीके के फायदे दुनिया में भी देखने को मिल रहा है एक यूरोपियन डॉक्टर का कहना है कि आंख पानी सेहत का बात पर जोर दे, अपने आप को दिन में कई बार धोते रहो चेहरा धोने से मुंह पर कील नहीं निकलते।
  6. हम सभी जानते हैं कि हमारे कोहनी पर तीन बड़ी रगें है जिसका ताल्लुक दिल जिगर और दिमाग से है, वजू के वक्त कोहनियों समेत हाथ धोने से दिल दिमाग और जिगर को तकवीयत पहुंचती है, और भी वजू करने के अनगिनत फ़ायदे है।

वजू के फ़ायदे आखीरत में

1.यह गुनाह झड़ने का जरिया है अल्लाह करीम के आखरी रसूल सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने फरमाया जब कोई बंदा वजू करते वक्त कुली करता है तो उसके मुंह से गुनाह निकल जाते हैं।

2.बरोजे कियामत वजू करने वाले की पेशानी चमकती होगी हुजूर सरापा नूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम का फरमान है कि जब मेरी उम्मत को कयामत के दिन पुकारा जाएगा तो वजू के बाइस उनकी पेशानियां और कदम चमकती होगी।

3.हम सभी के प्यारे आका सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया की वजू करना और मस्जिद की तरफ कसरत से चलना तथा नमाज के लिए इंतजार करना यही गुनाहों से हिफाजत का कलआ है।

4.हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि जो बंदा बावजू अपनी अल्लाह पाक का जिक्र करते हुए अपने बिस्तर की तरफ आए यहां तक की उस पर गुणुदगी छा जाए जो भी वह अपने रब से मांगेगा अल्लाह त आला उसे भलाई अता फरमा देगा।

5.हम सभी को जन्नत दिलाने वाले प्यारे आका सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जो शख्स अच्छे तरीके से वजू करे और दो रकअत दिल से अदा करे तो उसके लिए जन्नत वाजिब हो जाएगी।

6.हम गुनहगारों की सफाअत फरमाने वाले प्यारे आका सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया जो वजू होने के बाद भी वजू करेगा उसके लिए दस नेकिया लिखी जाएगी।

FAQs

Q. वजू के बिना क्या क्या नहीं करना चाहिए?

Ans. वजू के बिना नमाज नहीं पढ़ना चाहिए कुरान की तिलावत तो दूर की बात छूना तक नहीं चाहिए क्योंकि नमाज व सजदए तिलावत और कुरान शरीफ छूने के लिए वजू करना फर्ज है।

Q. क्या अपना या दुसरा का सित्र यानि गुप्तांग देखने से वजू टूट जाता है?

Ans. यह गलतफहमी आम लोगों के बीच काफी मशहूर है कि किसी का गुप्तांग देखने से या फिर अपना गुप्तांग देखने से वजू टूट जाता है, हालांकि यह वजू के आदाब में से है कि नाफ से लेकर जांघ के निचे तक छुपाना चाहिए।

Q. वजू में क्या एक हाथ से मुंह धोना चाहिए?

Ans. आजकल के लोगों में यह मशहूर किस्सा हो गया है कि वे सभी चीजों जैसे वजू में भी मनमानी करते हैं, एक हाथ से मुंह या चेहरा धोना यह राफजियों और काफिरों का तरीका है।

Q. क्या थोड़ा सा भी कय या खून से वजू टूट जाती है?

Ans. ऐसे में शरीयत का यह हुक्म है कि अगर खून थोड़ा-थोड़ा निकल रहा हो जो बह कर ना निकले या थोड़ी कय जो मुंह भर ना निकले वो पाक है और पाक चीजों से वजू नहीं जाती, अगर बार बार थोड़ा कय आ रहा है और मुंह भर गया तो ऐसे में नापाक हो जाती है।

Q. वजू करते वक्त कोई अंग धोने को छूट जाए तो क्या करें?

Ans. आपको चाहिए को पुरा ध्यान से वजू करे, लेकिन कोई हिस्सा धोना भूल गए और वजू पुरा कर लिए और बाद यानि आखिरी वक्त पर मालुम हुआ तो ऐसे में बाया पांव धो लें।

आखिरी बात

हमने इस पैगाम के जरिए आपको वजू करने का तरीका और और वजू करने की दुआ के साथ साथ वजू से संबंधित बहुत सारी जानकारी दिया है, आपको यह आर्टिकल जरूर फायदेमंद साबित हुआ होगा इस आर्टिकल को हमने अच्छे तरीके से जानकारी इकट्ठा करके और सभी जानकारी को आसान भाषा में आप तक पहुंचाया है

हमारा कोशिश शुरुआत से लेकर अभी तक यही रहा है कि अपने मोमिनों तक इस्लामिक जानकारी आसान और शुद्ध सरल भाषा में पहुंचाएं, हमें यह एहसास हो रहा है कि हम अपनी कोशिश से कामयाब हो रहे हैं।

My name is Muhammad Ittequaf and I'm the Editor and Writer of Zoseme. I'm a Sunni Muslim From Ranchi, India. I've experience teaching and writing about Islam Since 2019. I'm writing and publishing Islamic content to please Allah SWT and seek His blessings.

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